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ईडी का नोटिस : 5,551 करोड़ के घपले का मामला, देना पड़ सकता है तीन गुना जुर्माना

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा कानून उल्लंघन मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 5,551 करोड़ रुपये से ज्यादा के विदेशी मुद्रा कानून उल्लंघन मामले में मोबाइल फोन बनाने वाली चीन की कंपनी शाओमी (Xiaomi), कंपनी के सीएफओ और डायरेक्टर समीर बी राव, पूर्व एमडी मनु कुमार जैन और तीन विदेशी बैंकों …

ईडी का नोटिस : 5,551 करोड़ के घपले का मामला, देना पड़ सकता है तीन गुना जुर्माना
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नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा कानून उल्लंघन मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 5,551 करोड़ रुपये से ज्यादा के विदेशी मुद्रा कानून उल्लंघन मामले में मोबाइल फोन बनाने वाली चीन की कंपनी शाओमी (Xiaomi), कंपनी के सीएफओ और डायरेक्टर समीर बी राव, पूर्व एमडी मनु कुमार जैन और तीन विदेशी बैंकों को कारण बताओ नोटिस भेजा है। जांच एजेंसी ने शुक्रवार को एक बयान में यह जानकारी दी। इसके मुताबिक, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के निर्णायक प्राधिकरण ने फेमा की धारा 16 के अंतर्गत शाओमी टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, उसके दो अधिकारियों, सिटी बैंक (Citi Bank), एचएसबीसी बैंक (HSBC Bank) और डायचे बैंक एजी (Deutsche Bank AG) को नोटिस भेजे हैं।

ईडी का नोटिस : 5,551 करोड़ के घपले का मामला, देना पड़ सकता है तीन गुना जुर्माना

फेमा मामले की जांच पूरी होने के बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है और जब मामले का निपटान होता है तो आरोपी को उल्लंघन राशि का तीन गुना तक जुर्माना चुकाना पड़ सकता है। जांच एजेंसी ने कहा कि शाओमी के साथ जैन और राव को भी यह नोटिस भेज दिया गया है। ईडी ने इससे पहले अवैध मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में शाओमी टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों में जमा 5,551.27 करोड़ रुपये जब्त कर लिए थे। देश के मोबाइल फोन मार्केट में चीनी कंपनियों का दबदबा है। इनमें शाओमी, ओप्पो (Oppo), वीवो (Vivo) और हुवावे (Huawei) शामिल हैं। भारत में ये कंपनियों दोनों हाथों से कमा रही हैं लेकिन एक भी पैसे का टैक्स (Tax Payment) नहीं देती हैं। सरकार ने इन कंपनियों के गोरखधंधे को उजागर करने के लिए एक विस्तृत जांच (Multi agency probe) शुरू की है। इसमें इन कंपनियों के कारनामे सामने आ रहे हैं।

क्या हैं आरोप
चीनी कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने अपनी इनकम के बारे में जानकारी छिपाई, टैक्स से बचने के लिए प्रॉफिट की जानकारी नहीं दी और भारतीय बाजार में घरेलू इंडस्ट्री (Domestic Company) को तबाह करने के लिए अपने दबदबे का इस्तेमाल किया। साथ ही चीनी कंपनियों पर कंपोनेंट्स लेने और प्रोडक्ट्स के डिस्ट्रिब्यूशन में पारदर्शिता नहीं बरतने का भी आरोप है। सरकार सभी संभावित मुद्दों की जांच कर रही है। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी की भी इस पर करीबी नजर है।
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