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चचेरे-ममेरे भाई बहनों में शादी: जानिए क्या है सपिंड विवाह, हाईकोर्ट ने लगा दी रोक

चचेरे-ममेरे भाई बहनों में शादी: जानिए क्या है सपिंड विवाह, हाईकोर्ट ने लगा दी रोक
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जब हमारे देश का संविधान बनाया गया उसी के साथ लोगों को अपने मौलिक अधिकार भी दे दिए गए हैं जिसमें से एक अधिकार है। शादी का कोई भी लड़का या लड़की अपने मनपसंद शख्स से विवाह कर सकते हैं इसमें जाति धर्म या फिर क्षेत्र की बाधा नहीं आएगी। लेकिन देश में आज के समय में कुछ ऐसे रिश्ते भी होते हैं जिनमें शादी नहीं की जाती है इन्हें सपिंड विवाह कहते हैं। इतना ही नहीं अगर आपके पास मौलिक अधिकार है फिर भी आप इस तरह के रिश्ते में शादी नहीं कर सकते हैं। आपको बता दे कि दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस हफ्ते ही एक महिला की याचिका को खारिज कर दिया है। दरअसल वह हिंदू मैरिज एक्ट 1995 की धारा को और संवैधानिक घोषित करने की लंबे समय से कोशिश कर रही थी यह धारा दो हिंदुओं के बीच इस तरह की शादी को रोकते हैं। अगर आपके समुदाय में इस तरह का कोई रिवाज है तो आप शादी कर सकते हैं। आपको बता दे की 22 जनवरी को हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अगर शादी के लिए साथी चुनने को बिना नियमों के छोड़ दिया जाए तो गैर कानूनी रिश्ते को मान्यता मिल सकती है।

सबसे पहले समझिए क्या है सपिंड विवाह

कई लोगों को इस विवाह के बारे में पता नहीं है यह उन दो लोगों के बीच होता है जो आपस में खून के बहुत करीबी रिश्ते में होते हैं इसके अलावा हिंदू मैरिज एक्ट में ऐसे रिश्ते को ही सपिंड विवाह कहते हैं। इतना ही नहीं इसके मुताबिक अगर दो लोगों में से एक का सीधा पूर्वज हो और वह रिश्ता खून के रिश्ते के सीमा के अंदर आता है तो दोनों का कोई एक ऐसा पूर्वज हो जो दोनों के एक सपिंड रिश्ते की सीमा के अंदर आता हो। हिंदू विवाह अधिनियम के मुताबिक, कोई लड़का या लड़की तीन पीढ़ियों तक अपनी मां की ओर से किसी से शादी नहीं कर सकता। मतलब, अपने भाई-बहनों, माता-पिता, दादा-दादी और अपनी मां की ओर से तीन पीढ़ियों के भीतर के रिश्तेदारों से शादी करना पाप भी है और कानून के खिलाफ भी।

विवाह को रोकने में है कोई छूट ?

आपको बता दे कि इस नियम में एक छूट दी गई है यदि नियम के तहत ऊपर भी बताया गया है कि अगर लड़का और लड़की दोनों के समुदाय में सपिंड शादी का रिवाज है तो इस तरह की शादी की जा सकती है। इसके अलावा आपको बता दे कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 3 ए में रिवाज का जिक्र करते हुए बताया गया है कि एक रिवाज को बहुत लंबे समय से लगातार और बिना किसी बदलाव के मान्यता मिलनी चाहिए। इतना ही नहीं यह रिवाज भी प्रचलित होना चाहिए उसे क्षेत्र कबीले समूह या परिवार के हिंदू मानने वाले उसका पालन कानून की तरह करते हो। इसके अलावा ध्यान रखना यह भी जरूरी है की पुरानी परंपरा ही काफी नहीं है अगर कोई रिवाज इन शर्तों को पूरा करता है तो उसे तुरंत मान्यता दे दी जानी चाहिए। देखा जाए तो यह रिवाज अजीब नहीं है और समाज के हित के विरुद्ध भी नहीं है इसके अलावा अगर परिवार के अंदर कोई रीति-रिवाज चलता है तो उसे बंद नहीं होना चाहिए।

Rohit Kumar

Rohit Kumar

Has about 3 years of experience in the field of media. Started career with VR100 news channel, where worked on digital media for 1 year. After this, I got the experience of working on input for about 2 months in NextKhabar channel. After this, he got 2 years experience as Anchor cum Producer in National India News. Now serving in Vrsamachar website. Working here on gadgets and entertainment news. Our aim is to deliver great stories to the people.


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