इमरान खान जिंदा है या नहीं – पाकिस्तान में इमरान खान को लेकर मौत की अफवाह ने बढ़ाई अफरातफरी | Imran Khan Latest News

पाकिस्तान की अशांत राजनीति में एक बार फिर एक अफवाह ने सनसनी फैला दी। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मृत्यु की झूठी खबर ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया, लेकिन इस अफवाह के साये में सामने आई एक और वास्तविक और दिल दहला देने वाली घटना ने सत्ता के निरंकुश रवैये को बेनकाब कर दिया।
मौत की अफवाह और सोशल मीडिया पर छाया कोहराम
हाल ही में, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अचानक यह खबर आग की तरह फैल गई कि पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेता इमरान खान की मृत्यु हो गई है। इस खबर ने न केवल उनके समर्थकों बल्कि आम जनता में भी दहशत फैला दी। हालाँकि, जल्द ही यह खबर पूरी तरह से निराधार और गलत साबित हुई। इमरान खान सुरक्षित और जीवित हैं। लेकिन इस झूठी सूचना ने जिस तरह से लोगों का ध्यान खींचा, वह उनकी देश की राजनीति में मौजूदगी के महत्व को दर्शाता है।
अफवाह के बाद सामने आई एक कड़वी सच्चाई
जब देश इमरान खान की मौत की अफवाह पर चर्चा कर रहा था, तभी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसने पाकिस्तान में मानवाधिकारों और पुलिसिया बर्बरता की एक और कड़वी तस्वीर पेश की। यह वीडियो पंजाब प्रांत के एक गाँव से सामने आया, जहाँ पुलिस ने इमरान खान के समर्थन में नारेबाजी कर रही तीन बहनों पर निर्मम लाठीचार्ज किया।
वीडियो में कैद हुई पुलिसिया बर्बरता
वायरल हुए वीडियो फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि कैसे पुलिसकर्मी महिलाओं को बेरहमी से पीट रहे हैं। इस घटना ने न केवल पूरे देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आक्रोश पैदा किया है। महिलाओं के प्रति इस हिंसक व्यवहार ने सवाल खड़े किए हैं कि क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने के लिए राज्य की शक्ति का इस्तेमाल इस हद तक किया जा सकता है।
राजनीतिक दमन का एक नया चेहरा
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना पाकिस्तान में चल रहे राजनीतिक दमन का एक और उदाहरण है। इमरान खान और उनकी पार्टी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, और उनके समर्थकों को निशाना बनाने की यह घटना एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा लगती है। इस घटना ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है।
एक सवाल जो मुंह बाए खड़ा है
इमरान खान की मौत की अफवाह और उसके बाद सामने आई यह वीडियो घटना, दोनों मिलकर पाकिस्तान की वर्तमान राजनीतिक उथल-पुथल को दर्शाते हैं। एक तरफ जहां एक लोकप्रिय नेता के जीवन-मृत्यु को लेकर अफवाहें उड़ाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर उनके समर्थकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। यह घटना एक बड़े सवाल को जन्म देती है: क्या किसी देश की लोकतांत्रिक नींव को इस हद तक कमजोर किया जा सकता है? इस सवाल का जवाब आने वाला वक्त ही देगा।